तब आखिरकार हमारा भोजन, विशेषतः सब्जी और रोटियां अन्य लोगों की अपेक्षा ठीक-ठाक पकाकर-सेंककर लाई जाती। कभी-कभी पर्यवेक्षक भोजन चखकर देखता। उसे दिखाने के लिए पहले से ही कुछ रोटियां भलीभांति सेंककर रखी जाती। उन्हें ही राजबंदियों में बांटा जाता। इस तरह कम-से-कम राजबंदियों को तनिक अच्छा भोजन मिलने लगा। इस आंदोलन से यह लाभ तो हुआ। क्यांेकि कहने की आवश्यकता नहीं कि बंदीगृह के कुग्रास तथा कच्चे भोजन का परिणाम उस वर्ग के लोगों पर,
तब आखिरकार हमारा भोजन, विशेषतः सब्जी और रोटियां अन्य लोगों की अपेक्षा ठीक-ठाक पकाकर-सेंककर लाई जाती। कभी-कभी पर्यवेक्षक भोजन चखकर देखता। उसे दिखाने के लिए पहले से ही कुछ रोटियां भलीभांति सेंककर रखी जाती। उन्हें ही राजबंदियों में बांटा जाता। इस तरह कम-से-कम राजबंदियों को तनिक अच्छा भोजन मिलने लगा। इस आंदोलन से यह लाभ तो हुआ। क्यांेकि कहने की आवश्यकता नहीं कि बंदीगृह के कुग्रास तथा कच्चे भोजन का परिणाम उस वर्ग के लोगों पर,