क्ुल मिलाकर बंदी विभाग की नीति पर ही था- यह बात ध्यान में रखनी चाहिए।
ऐसा नहीं था कि बंदीगृह में भोजन के समय बंदियों को धूप में तथा वर्षा में प्रायः बैठाया जाता। बंदीगृह के बाहर भी जिस जिले में बारी से अलग दूसरे अधिकारी होते, उन जिलों में भी प्रायः यही कष्ट होते। इतना ही नहीं, अपितु उन बाहरी जिलों में से कुछ इलाकों में मूसलधार वर्षा में खड़े रहकर ही बंदियांे को भोजन करना पड़ता। वर्षा में काम करते-करते कपड़े पूरे गीले होते,
क्ुल मिलाकर बंदी विभाग की नीति पर ही था- यह बात ध्यान में रखनी चाहिए।
ऐसा नहीं था कि बंदीगृह में भोजन के समय बंदियों को धूप में तथा वर्षा में प्रायः बैठाया जाता। बंदीगृह के बाहर भी जिस जिले में बारी से अलग दूसरे अधिकारी होते, उन जिलों में भी प्रायः यही कष्ट होते। इतना ही नहीं, अपितु उन बाहरी जिलों में से कुछ इलाकों में मूसलधार वर्षा में खड़े रहकर ही बंदियांे को भोजन करना पड़ता। वर्षा में काम करते-करते कपड़े पूरे गीले होते,