अफसर तय करेंगे) वह निर्धारित समय होते ही अफसर चिल्लाता-‘चलो उठो, खान हो गया।’ बस, पेटी अफसर ने कहा, खाना हो गया तो होना ही चाहिए। फिर चाहे किसी का भोजन समाप्त हो गया हो अथवा नहीं। तपाक से सभी को उठकर खड़े होना चाहिए। शेष अन्न पेट खाली होने पर भी जूठन समझकर कुड़ेदान में फंेक दिया जाता। यदि कोई उठकर खड़ा नहीं हुआ तो कुछ निर्मम पेटी अफसर हाथ के बंेत सपासप घुमाते हुए उस पंक्ति में घुसकर थालियां उड़ा देते और भगदड़ मचाते। किसी के
अफसर तय करेंगे) वह निर्धारित समय होते ही अफसर चिल्लाता-‘चलो उठो, खान हो गया।’ बस, पेटी अफसर ने कहा, खाना हो गया तो होना ही चाहिए। फिर चाहे किसी का भोजन समाप्त हो गया हो अथवा नहीं। तपाक से सभी को उठकर खड़े होना चाहिए। शेष अन्न पेट खाली होने पर भी जूठन समझकर कुड़ेदान में फंेक दिया जाता। यदि कोई उठकर खड़ा नहीं हुआ तो कुछ निर्मम पेटी अफसर हाथ के बंेत सपासप घुमाते हुए उस पंक्ति में घुसकर थालियां उड़ा देते और भगदड़ मचाते। किसी के