में ही अधिक थी। इसके लिए बंदीगृह में जो साध्य था, वह सार्वजनिक कार्य सिद्व करने का आंदोलन छोड़कर नहीं। अपितु उसे अन्य उपायों द्वारा जारी रखकर ही। प्रकट रूप में उन नियमों का उल्लघंन न करते हुए जिससे कि मुझपर अभियोग चलाया जा सके-मैं कार्यरत था ही, साथ-साथ बाहर निकलने के अवसर की तलाश में भी प्रयत्नरत था।
राजबंदियों में से जिन लोगों को प्रथमतः कारागार से बाहर भेजा गया, वे निश्चित अवधि के दंड प्राप्त अर्थात् ऐसे बंदी थे जिन्हें
में ही अधिक थी। इसके लिए बंदीगृह में जो साध्य था, वह सार्वजनिक कार्य सिद्व करने का आंदोलन छोड़कर नहीं। अपितु उसे अन्य उपायों द्वारा जारी रखकर ही। प्रकट रूप में उन नियमों का उल्लघंन न करते हुए जिससे कि मुझपर अभियोग चलाया जा सके-मैं कार्यरत था ही, साथ-साथ बाहर निकलने के अवसर की तलाश में भी प्रयत्नरत था।
राजबंदियों में से जिन लोगों को प्रथमतः कारागार से बाहर भेजा गया, वे निश्चित अवधि के दंड प्राप्त अर्थात् ऐसे बंदी थे जिन्हें