आजीवन कालेपानी पर नहीं भेजा गया था। उन्हें तो पांच-चार-तीन वर्षों के लिए ही भेजा गया था। उनमें से कइयों को बाहर बहुत कठिन काम करना पड़ता। फिर भी मेरा उनसे यही अनुरोध रहता कि ‘बाहर ही रहें। आप लोगों के बाहर रहने से धीरे-धीरे आजीवन कोलपानी के राजबंदियों को भी आहर छोड़ा जाएगा। बाहर रहकर आप प्रचार कार्य अधिक कर सकते हैं। अतः भले ही कितने ही कष्ट हों, उन्हें झेलें, परंतु इन्कार करके अपने आपको पुनः कारागृह में लाकर ठूंसने का अवसर अधिकारियों को यथासंभव न दें,
आजीवन कालेपानी पर नहीं भेजा गया था। उन्हें तो पांच-चार-तीन वर्षों के लिए ही भेजा गया था। उनमें से कइयों को बाहर बहुत कठिन काम करना पड़ता। फिर भी मेरा उनसे यही अनुरोध रहता कि ‘बाहर ही रहें। आप लोगों के बाहर रहने से धीरे-धीरे आजीवन कोलपानी के राजबंदियों को भी आहर छोड़ा जाएगा। बाहर रहकर आप प्रचार कार्य अधिक कर सकते हैं। अतः भले ही कितने ही कष्ट हों, उन्हें झेलें, परंतु इन्कार करके अपने आपको पुनः कारागृह में लाकर ठूंसने का अवसर अधिकारियों को यथासंभव न दें,