जो वे चाहते हैं।’ मेरे इस अनुरोध पर वे असहनीय कष्ट और यंत्रणाएं झेलते हुए बाहर ही रहे। इतने में राज्यारोहण के पश्चात् पहली हड़ताल के परिणामस्वरूप सरकारी आदेश भी आ गया कि आजन्म राजबंदियों में से भी कुछ चुनिंदा लोगों को बाहर छोड़ा जाए। उसके अनुसार दो-चार जनों को चुनकर बाहर छोड़ा गया। कहने की आवश्यकता नहीं कि उनमें मैं या मेरे बंधु नहीं थे, तथापि उनके जाने से इतना सिद्व हो गया कि राजबंदियों को भी बाहर भेजा जा सकता है। अतः आज नहीं तो कल,
जो वे चाहते हैं।’ मेरे इस अनुरोध पर वे असहनीय कष्ट और यंत्रणाएं झेलते हुए बाहर ही रहे। इतने में राज्यारोहण के पश्चात् पहली हड़ताल के परिणामस्वरूप सरकारी आदेश भी आ गया कि आजन्म राजबंदियों में से भी कुछ चुनिंदा लोगों को बाहर छोड़ा जाए। उसके अनुसार दो-चार जनों को चुनकर बाहर छोड़ा गया। कहने की आवश्यकता नहीं कि उनमें मैं या मेरे बंधु नहीं थे, तथापि उनके जाने से इतना सिद्व हो गया कि राजबंदियों को भी बाहर भेजा जा सकता है। अतः आज नहीं तो कल,