मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

हमें भी सहूलियत देने के लिए अधिकारियों को बाध्य करने का एक अधिक कारगर साधन मिल गया, यह देखकर हमने धीरज रखा।

जो राजबंदी बाहर गए उनमें से कई डेढ़-दो वर्षों तक कारागृह में कष्ट झेल रहे थे। उन्हें मुझसे पहले ही अंदमान में आना पड़ा, अतः कष्टों का प्रथम आघात उन्हें सहना पड़ा। उनमें से कुछ लोगों को जब कोल्हू पर लगाया गया तब कभी-कभी पठान अफसर उनकी नाक के सामने अपनी मुट्ठी के एक प्रहार के साथ तुम्हारी नाक तोड़ दूंगा, समझे?, उनमें


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हमें भी सहूलियत देने के लिए अधिकारियों को बाध्य करने का एक अधिक कारगर साधन मिल गया, यह देखकर हमने धीरज रखा।

जो राजबंदी बाहर गए उनमें से कई डेढ़-दो वर्षों तक कारागृह में कष्ट झेल रहे थे। उन्हें मुझसे पहले ही अंदमान में आना पड़ा, अतः कष्टों का प्रथम आघात उन्हें सहना पड़ा। उनमें से कुछ लोगों को जब कोल्हू पर लगाया गया तब कभी-कभी पठान अफसर उनकी नाक के सामने अपनी मुट्ठी के एक प्रहार के साथ तुम्हारी नाक तोड़ दूंगा, समझे?, उनमें


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