के सामने सिर झुकाने से साफ-मना किया। इस प्रकार कारागृहीय अवधि समाप्त करके उन्हें बाहर उपनिवेश में जब भेजा गया तब हम सभी को यह आशा थी कि अब उनसे सहूलियत के साथ व्यवहार होगा और उन्हें आराम मिलेगा। साधारण बंदीवानों में जो शिक्षा, योग्यता तथा सच्चाई में इन राजबंदियों के जूते उठाने की भी योग्यता नहीं रखते थे, उन्हें बाहर क्लर्क, लेखक, गणक जैसे पदों पर नियुक्त किया जाता और दस-पांच बंदी उनको सेवा के लिए मिलते। अतः कोई भी यह
के सामने सिर झुकाने से साफ-मना किया। इस प्रकार कारागृहीय अवधि समाप्त करके उन्हें बाहर उपनिवेश में जब भेजा गया तब हम सभी को यह आशा थी कि अब उनसे सहूलियत के साथ व्यवहार होगा और उन्हें आराम मिलेगा। साधारण बंदीवानों में जो शिक्षा, योग्यता तथा सच्चाई में इन राजबंदियों के जूते उठाने की भी योग्यता नहीं रखते थे, उन्हें बाहर क्लर्क, लेखक, गणक जैसे पदों पर नियुक्त किया जाता और दस-पांच बंदी उनको सेवा के लिए मिलते। अतः कोई भी यह