करती हैं। औषधि वही है जो रोग को दूर भगाती है-साधारण जगत् की यह व्याख्या इस उलटे अंदमानी जगत् में उलटी होना भी तो स्वाभाविक है।
ज्वर या दस्त की दवा है क्या
इस तरह एक बंदी दूसरे से दबी तथा झंुझलाती आवाज में पूछता तो उस वाक्य का अर्थ यह नहीं था कि वह दवा जो ज्वर को भगाती है। अंदमानी जगत् में किसी रोग की दवा का अर्थ था- वह दवा, जो रोग उत्पन्न करती है। सफेद कनेर की जड़ घिसकर खाने से खून के दस्त शुरू हो जाते हैं। घाव में
करती हैं। औषधि वही है जो रोग को दूर भगाती है-साधारण जगत् की यह व्याख्या इस उलटे अंदमानी जगत् में उलटी होना भी तो स्वाभाविक है।
ज्वर या दस्त की दवा है क्या
इस तरह एक बंदी दूसरे से दबी तथा झंुझलाती आवाज में पूछता तो उस वाक्य का अर्थ यह नहीं था कि वह दवा जो ज्वर को भगाती है। अंदमानी जगत् में किसी रोग की दवा का अर्थ था- वह दवा, जो रोग उत्पन्न करती है। सफेद कनेर की जड़ घिसकर खाने से खून के दस्त शुरू हो जाते हैं। घाव में