सूई से सिलाई करने के लिए- अब यह स्मरण नहीं किसमें भिगोकर-डोरा पिरोया जाए तो वह घाव सड़ जाता है और छह महीनों तक खटिया पकड़ी जा सकती है। यह सारी जानकारी सत्य है या मिथ्या, पता नहीं; लेकिन प्रायः सभी लोग बताते कि यह उनका अनुभव है। अब कोल्हू मंे जुतने, बाहर लकड़ी तोड़ने, जंगल काटने, बुनाई आदि कामों के भय से प्रतिकूल जड़ी-बुटियां तथा औषधियां खाकर, अपने पैरों पर स्वयं घाव बनाकर, उसे सड़ाने के लिए डोरे डालकर, सूई को कंठ में चुभोकर और यह बहाना करके कि खून की
सूई से सिलाई करने के लिए- अब यह स्मरण नहीं किसमें भिगोकर-डोरा पिरोया जाए तो वह घाव सड़ जाता है और छह महीनों तक खटिया पकड़ी जा सकती है। यह सारी जानकारी सत्य है या मिथ्या, पता नहीं; लेकिन प्रायः सभी लोग बताते कि यह उनका अनुभव है। अब कोल्हू मंे जुतने, बाहर लकड़ी तोड़ने, जंगल काटने, बुनाई आदि कामों के भय से प्रतिकूल जड़ी-बुटियां तथा औषधियां खाकर, अपने पैरों पर स्वयं घाव बनाकर, उसे सड़ाने के लिए डोरे डालकर, सूई को कंठ में चुभोकर और यह बहाना करके कि खून की