उलटियां हो रही हैं अथवा थूक में खून आ रहा है अथवा यह जताने के लिए कि पागलपन का नाटक सच है- तरह-तरह की कोशिशंे होती।
मल-मूत्र मुंह पर पोतकर किंचित् सेवन करके भी जैसे-तैसे डाॅक्टरों के सामने अपनी बीमारी अथवा पागलपन की सत्यता सिद्व करने के लिए प्रयत्नरत बंदी हमारे ही नहीं अपितु उन यात्रियों के भी, जो अंदमान में हफ्ते भर के लिए ही ठहरे होते, अवलोकन में आए बिना नहीं रहते। ये बंदी डाॅक्टरों की आंखों में बार-बार धूल झोंकते।
उलटियां हो रही हैं अथवा थूक में खून आ रहा है अथवा यह जताने के लिए कि पागलपन का नाटक सच है- तरह-तरह की कोशिशंे होती।
मल-मूत्र मुंह पर पोतकर किंचित् सेवन करके भी जैसे-तैसे डाॅक्टरों के सामने अपनी बीमारी अथवा पागलपन की सत्यता सिद्व करने के लिए प्रयत्नरत बंदी हमारे ही नहीं अपितु उन यात्रियों के भी, जो अंदमान में हफ्ते भर के लिए ही ठहरे होते, अवलोकन में आए बिना नहीं रहते। ये बंदी डाॅक्टरों की आंखों में बार-बार धूल झोंकते।