इससे बेचारा डाॅक्टर यह नहीं जान पाता कि सच्चा रोगी कौन है? इस प्रकार का अप्रामाणिकता का अभ्यास दूर करने के लिए उन लोगों पर, जो इस तरह के रोग उत्पन्न करते हैं, अभियोग चलाकर उनके स्वस्थ होते ही उन पर बंेत बरसाए जाते। यद्यपि यह सब भले ही सत्य हो, परंतु जिस काम के भय से इस तरह ढीठ बदमाश भी जान-बुझकर विषैली जड़ी-बुटियांे का सेवन करके 104-5॰ तक ज्वर चढ़ाकर तड़पते रहते अथवा ऐसी दवाइयां गटकते, जिनसे खून के सतत दस्त होते और उन्हें पेट शूल की व्यथा से तड़पना पड़ता,
इससे बेचारा डाॅक्टर यह नहीं जान पाता कि सच्चा रोगी कौन है? इस प्रकार का अप्रामाणिकता का अभ्यास दूर करने के लिए उन लोगों पर, जो इस तरह के रोग उत्पन्न करते हैं, अभियोग चलाकर उनके स्वस्थ होते ही उन पर बंेत बरसाए जाते। यद्यपि यह सब भले ही सत्य हो, परंतु जिस काम के भय से इस तरह ढीठ बदमाश भी जान-बुझकर विषैली जड़ी-बुटियांे का सेवन करके 104-5॰ तक ज्वर चढ़ाकर तड़पते रहते अथवा ऐसी दवाइयां गटकते, जिनसे खून के सतत दस्त होते और उन्हें पेट शूल की व्यथा से तड़पना पड़ता,