मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

उन्हें यह सब सापेक्षतः अधिक आरामदायी प्रतीत होता। वह काम तथा परिश्रम में अथवा चोरी-डाकेजनी जैसे व्यवसाय में व्यतीत हुआ जिस काम का कष्ट भयंकर प्रतीत होता है, ऐसे काम जब बुद्विजीवी संभ्रांत वर्ग में पले राजबंदियों को दिए गए तब यह कहने की आवश्यकता ही नहीं कि उन्हें कितना कष्ट हुआ होगा।

रोग भी भोग ही प्रतीत होते

ऐसे ही कष्टप्रद काम जिन राजबंदियों को बंदीगृह से बाहर निकलने पर भी दिए गए, उनकी दुर्दशा के कुछ उदाहरण उन्हीं


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उन्हें यह सब सापेक्षतः अधिक आरामदायी प्रतीत होता। वह काम तथा परिश्रम में अथवा चोरी-डाकेजनी जैसे व्यवसाय में व्यतीत हुआ जिस काम का कष्ट भयंकर प्रतीत होता है, ऐसे काम जब बुद्विजीवी संभ्रांत वर्ग में पले राजबंदियों को दिए गए तब यह कहने की आवश्यकता ही नहीं कि उन्हें कितना कष्ट हुआ होगा।

रोग भी भोग ही प्रतीत होते

ऐसे ही कष्टप्रद काम जिन राजबंदियों को बंदीगृह से बाहर निकलने पर भी दिए गए, उनकी दुर्दशा के कुछ उदाहरण उन्हीं


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