है। उस कारागार में लगभग दो महीनों में कोई-न-कोई इस तरह गले में फंदा डालकर मृत्यु को गले लगाता; परंतु राजबंदी के रूप में इंदु ही पहली बार फंदा लगाकर मरा था। मेरा मन कहने लगा, एक दिन तुम्हारी भी यही अवस्था होगी। इस वर्षों में ही ऊबकर वह चल बसा, तुम्हें तो पूरे पचास वर्षों का दंड है अर्थात् तुम्हें मरने के अतिरिक्त कोई उपाय नहीं।
परंतु इन दुःखद विचारों में गलित धैर्य होकर शांत बैठने के लिए भी बारी साहब ने पर्याप्त अवकाश नहीं दिया,
है। उस कारागार में लगभग दो महीनों में कोई-न-कोई इस तरह गले में फंदा डालकर मृत्यु को गले लगाता; परंतु राजबंदी के रूप में इंदु ही पहली बार फंदा लगाकर मरा था। मेरा मन कहने लगा, एक दिन तुम्हारी भी यही अवस्था होगी। इस वर्षों में ही ऊबकर वह चल बसा, तुम्हें तो पूरे पचास वर्षों का दंड है अर्थात् तुम्हें मरने के अतिरिक्त कोई उपाय नहीं।
परंतु इन दुःखद विचारों में गलित धैर्य होकर शांत बैठने के लिए भी बारी साहब ने पर्याप्त अवकाश नहीं दिया,