फाड़े मैं देखता ही रह गया। अभी कल ही तो सुध्या समय हट्टे-कट्टे गठीले सुदृढ़ बदन का वह युवक कोठरी में बातें करते बंद हो गया था। प्रातःकाल उठकर देखा तो अपने ही कपड़े फाड़कर उनसे बनाई डोरी से गले में फंदा लगाकर, टूटी गरदन, जीभ बाहर निकली हुई, दोनों टांगे ढीली-ढाली लटकती हुई अवस्था में ऊपरवाली खिड़की में लटका हुआ। उस अभिमानी को अपमानित जीवन से मृत्यु अधिक सुखकर प्रतीत हुई।
ऐसा आभास होने लगा इधर-उधर सब जगह कृष्णछाया फैली हुई
फाड़े मैं देखता ही रह गया। अभी कल ही तो सुध्या समय हट्टे-कट्टे गठीले सुदृढ़ बदन का वह युवक कोठरी में बातें करते बंद हो गया था। प्रातःकाल उठकर देखा तो अपने ही कपड़े फाड़कर उनसे बनाई डोरी से गले में फंदा लगाकर, टूटी गरदन, जीभ बाहर निकली हुई, दोनों टांगे ढीली-ढाली लटकती हुई अवस्था में ऊपरवाली खिड़की में लटका हुआ। उस अभिमानी को अपमानित जीवन से मृत्यु अधिक सुखकर प्रतीत हुई।
ऐसा आभास होने लगा इधर-उधर सब जगह कृष्णछाया फैली हुई