नारियल की भूसी से सिर से पांव तक शरीर सना हुआ, पांव में बेड़ियां-बीस-बीस पौंड तेल से भरी बाल्टी छलकाते तथा कंघे पर भूसे का बोरा ढोते, झुके हुए नंग-धडंग इंदु का दर्शन मैं दूर से करता। हम सभी उसी तरह चल रहे थे। इतने में एक दिन प्रातःकाल के समय कोठरियांे के द्वार खुल गए- हम बाहर निकल ही रहे थे कि वाॅर्डर ने गुपचुप मुझे बताया, ‘‘किसी को मेरा नाम मत बताना, इंदु ने फांसी लगा ली है।’’¹
मुझे जैसे काठ मार गया। विस्मित हो मुंह
नारियल की भूसी से सिर से पांव तक शरीर सना हुआ, पांव में बेड़ियां-बीस-बीस पौंड तेल से भरी बाल्टी छलकाते तथा कंघे पर भूसे का बोरा ढोते, झुके हुए नंग-धडंग इंदु का दर्शन मैं दूर से करता। हम सभी उसी तरह चल रहे थे। इतने में एक दिन प्रातःकाल के समय कोठरियांे के द्वार खुल गए- हम बाहर निकल ही रहे थे कि वाॅर्डर ने गुपचुप मुझे बताया, ‘‘किसी को मेरा नाम मत बताना, इंदु ने फांसी लगा ली है।’’¹
मुझे जैसे काठ मार गया। विस्मित हो मुंह