ने सभी को निश्चित करवाया कि फांसी का कारण आकस्मिक पागलपन अथवा आपसी कलह नहीं, अपितु असहनीय कष्ट, अत्याचार, आशाशून्यता ही हैः और जैसे-तैसे एक ऐसे राजबंदी का नाम, जो बारी से भयभीत नहीं था, गवाह के रूप में आते ही उसके द्वारा इंदु के कष्टों का कच्चा चिट्ठा अधिकारियों के सामने खुलवाया। इलाहाबाद के ‘स्वराज्य’ पत्र के संपादकों में से जो तीन-चार सूरमा और निर्भीक युवक राजबंदियों में आए हुए थे, उनमें से एक ने गवाही दी और किसी प्रकार
ने सभी को निश्चित करवाया कि फांसी का कारण आकस्मिक पागलपन अथवा आपसी कलह नहीं, अपितु असहनीय कष्ट, अत्याचार, आशाशून्यता ही हैः और जैसे-तैसे एक ऐसे राजबंदी का नाम, जो बारी से भयभीत नहीं था, गवाह के रूप में आते ही उसके द्वारा इंदु के कष्टों का कच्चा चिट्ठा अधिकारियों के सामने खुलवाया। इलाहाबाद के ‘स्वराज्य’ पत्र के संपादकों में से जो तीन-चार सूरमा और निर्भीक युवक राजबंदियों में आए हुए थे, उनमें से एक ने गवाही दी और किसी प्रकार