यह सिद्व करने के लिए उन्होंने यह तर्क प्रस्तुत किया कि थियोसाॅफी की पुस्तक ही उसकी फांसी के लिए उत्तरदायी है, क्यांेकि इन पुस्तकों से बुद्वि क्षीण होती है मनुष्य नाक आदि पकड़ने के व्यसन में फंसकर पागल बन जाता है। यह नहीं कहा जा सकता कि बारी साहब की इस अंतिम उपपत्तिा पर हिंदुस्थान सरकार ने कितना विश्वास किया, परंतु इंदु के हिंदुस्थान स्थित बंधु ने हठ किया कि इसकी पूछताछ की जाए, तथापि उस समय तक तो यह विवाद समाप्तप्राय ही
यह सिद्व करने के लिए उन्होंने यह तर्क प्रस्तुत किया कि थियोसाॅफी की पुस्तक ही उसकी फांसी के लिए उत्तरदायी है, क्यांेकि इन पुस्तकों से बुद्वि क्षीण होती है मनुष्य नाक आदि पकड़ने के व्यसन में फंसकर पागल बन जाता है। यह नहीं कहा जा सकता कि बारी साहब की इस अंतिम उपपत्तिा पर हिंदुस्थान सरकार ने कितना विश्वास किया, परंतु इंदु के हिंदुस्थान स्थित बंधु ने हठ किया कि इसकी पूछताछ की जाए, तथापि उस समय तक तो यह विवाद समाप्तप्राय ही