था। बस फिर क्या था? इस आघात से कि इंदु फांसी से गया-जो जीवित रहे, वे भी अपने दिन गिनने लगे। पोर्ट ब्लेअर का वह उद्दंड परमेश्वर सरेआम कहने लगा कि इंदु की फांसी के संबंध मंे तुम लोगों ने चाहे जितना शोर किया, परंतु मेरा तो बाल भी बांका नहीं हुआ। राजबंदियों को ऐसे कुछ भी असहनीय कष्ट नहीं झेलने पड़ते और अंदमान में उनकी स्थिति यथासंभव सुसह्म है। ऐसे प्रतिवृत्त (रिपोर्ट) आने-जाने लगे कि इतने में एक भयंकर दुर्घटना घट गई।
हतभागी
था। बस फिर क्या था? इस आघात से कि इंदु फांसी से गया-जो जीवित रहे, वे भी अपने दिन गिनने लगे। पोर्ट ब्लेअर का वह उद्दंड परमेश्वर सरेआम कहने लगा कि इंदु की फांसी के संबंध मंे तुम लोगों ने चाहे जितना शोर किया, परंतु मेरा तो बाल भी बांका नहीं हुआ। राजबंदियों को ऐसे कुछ भी असहनीय कष्ट नहीं झेलने पड़ते और अंदमान में उनकी स्थिति यथासंभव सुसह्म है। ऐसे प्रतिवृत्त (रिपोर्ट) आने-जाने लगे कि इतने में एक भयंकर दुर्घटना घट गई।
हतभागी