इंदु विश्व के सामने अपना इतिहास उजागर नहीं कर सका। परंतु यह दूसरी दुर्घटना, जिसके संबंध में घटी, वह एक अन्य राजबंदी था।
उल्लासकर दत्त
उल्लासकर दत्त ने सौभाग्यवश बारह-तेरह वर्षों के पश्चात् मुक्ति मिलने पर अपना वृत्त जैसे भी स्मरण था, उतना लिखा। अतः उनका वृत्तांत उनके ही शब्दों में थोड़ा सा सुन लें। माणिकतल्ला षड्यंत्र कांड के युवाओं पर उनके द्वारा काम से मना करने के आरोप पर जो मुकदमा अंदमान में चला, उसके मजिस्टेªट ने भी यह कहा था,
इंदु विश्व के सामने अपना इतिहास उजागर नहीं कर सका। परंतु यह दूसरी दुर्घटना, जिसके संबंध में घटी, वह एक अन्य राजबंदी था।
उल्लासकर दत्त
उल्लासकर दत्त ने सौभाग्यवश बारह-तेरह वर्षों के पश्चात् मुक्ति मिलने पर अपना वृत्त जैसे भी स्मरण था, उतना लिखा। अतः उनका वृत्तांत उनके ही शब्दों में थोड़ा सा सुन लें। माणिकतल्ला षड्यंत्र कांड के युवाओं पर उनके द्वारा काम से मना करने के आरोप पर जो मुकदमा अंदमान में चला, उसके मजिस्टेªट ने भी यह कहा था,