को उस कोल्हू की बल्ली से हाथ-पांव बांधकर जकड़ना और अन्य व्यक्तियों को भागने का आदेश देना। अर्थात् वह व्यक्ति भूमि पर ही घसीटा जाकर लहूलुहान हो जाता। सिर धड़ाधड़ टकराता, मुंह फट जाता। मैंने प्रत्यक्ष उदाहरण देखा है-हाय-हाय! मनुष्य ने ही मनुष्य की कैसी गत बनाई है! इस प्रकार कोल्हू चलाकर संध्या समय थका-मांदा मैं कोठरी में बंद होने चला जाता, तब मुझे नहीं लगता कि कल पुनः उठता। हम कहा करते-मौजूदा स्थिति का सामना करना होगा, परंतु
को उस कोल्हू की बल्ली से हाथ-पांव बांधकर जकड़ना और अन्य व्यक्तियों को भागने का आदेश देना। अर्थात् वह व्यक्ति भूमि पर ही घसीटा जाकर लहूलुहान हो जाता। सिर धड़ाधड़ टकराता, मुंह फट जाता। मैंने प्रत्यक्ष उदाहरण देखा है-हाय-हाय! मनुष्य ने ही मनुष्य की कैसी गत बनाई है! इस प्रकार कोल्हू चलाकर संध्या समय थका-मांदा मैं कोठरी में बंद होने चला जाता, तब मुझे नहीं लगता कि कल पुनः उठता। हम कहा करते-मौजूदा स्थिति का सामना करना होगा, परंतु