पर कोल्हू में मनुष्य को जोता जाता है और वही तेल उससे प्रतिदिन अस्सी पौंड निकलवाया जाता है। कोल्हू में तीन जनों को लगाया जाता है। भोजन के चंद मिनटों को छोड़कर प्रातःकाल से सायंकाल तक ये लोग यह भय सवार रहता है कि तेल पूरा नहीं होगा। यदि कोई तनिक सुस्ताया तो समझिए कि निकट ही खड़े पेटी अफसर का डंडा तड़ाक से पीठ पर जम ही गया। इस मारपीट से भी यदि कोई भाग नहीं सका तो उसके होश ठिकाने पर लाने की अन्य उत्तोजक औषधि थी उस सुस्त बंदी
पर कोल्हू में मनुष्य को जोता जाता है और वही तेल उससे प्रतिदिन अस्सी पौंड निकलवाया जाता है। कोल्हू में तीन जनों को लगाया जाता है। भोजन के चंद मिनटों को छोड़कर प्रातःकाल से सायंकाल तक ये लोग यह भय सवार रहता है कि तेल पूरा नहीं होगा। यदि कोई तनिक सुस्ताया तो समझिए कि निकट ही खड़े पेटी अफसर का डंडा तड़ाक से पीठ पर जम ही गया। इस मारपीट से भी यदि कोई भाग नहीं सका तो उसके होश ठिकाने पर लाने की अन्य उत्तोजक औषधि थी उस सुस्त बंदी