मुझे लटकाया गया। उसी समय मुझे कुछ हरारत सी प्रतीत होने लगी। मैं दीवार से टिका वैसे ही खड़ा रहा। सामने से सूरज की किरणें मुझे सतत तपा रही थी। मेरा ज्वर बढ़ रहा था। कभी-कभी मुझे इस तरह का दृश्य दिखाई देने लगा कि मुझे बलपूर्वक कोई विषैली दवा पिला रहा है ं ं ं ंइस विलक्षण दृश्य के बाद एक सन्नाटा-सा हुआ, तभी डाॅक्टर आया। मुझे सर्दी लग रही थी-107॰ ज्वर था। मैं ग्लानि में ही हथकड़ी में झूल रहा था। (इससे पूर्व दो बार मुझे ज्वर चढ़ने का समाचार कार्यालय में भेजा गया था,
मुझे लटकाया गया। उसी समय मुझे कुछ हरारत सी प्रतीत होने लगी। मैं दीवार से टिका वैसे ही खड़ा रहा। सामने से सूरज की किरणें मुझे सतत तपा रही थी। मेरा ज्वर बढ़ रहा था। कभी-कभी मुझे इस तरह का दृश्य दिखाई देने लगा कि मुझे बलपूर्वक कोई विषैली दवा पिला रहा है ं ं ं ंइस विलक्षण दृश्य के बाद एक सन्नाटा-सा हुआ, तभी डाॅक्टर आया। मुझे सर्दी लग रही थी-107॰ ज्वर था। मैं ग्लानि में ही हथकड़ी में झूल रहा था। (इससे पूर्व दो बार मुझे ज्वर चढ़ने का समाचार कार्यालय में भेजा गया था,