विरूद्व तो कुछ भी कारागारीय अपराध दर्ज नहीं हैं।’ इस तरह नोंक-झोंक होते-होते निरूपाय होकर अंत में चीफ कमिश्नर को स्पष्ट शब्दों में कहना पड़ा कि ‘आपको कारागृह से बाहर नहीं निकाला जा सकता’ क्यांेकि ‘आपका कारागारीय आचरण’ बाहर गए हुए बंदियों की तुलना में अधिक अच्छा तो है, तथापि आपका पूर्वेतिहास महाभयंकर है।’¹ यदि पूर्वेतिहास पर ही गौर करना है तो फिर वर्तमान ‘आचरण अनापत्तिात’ होने का क्या लाभ हो सकता है? अर्थात् हम सदाचरण करें तो भी कारागार और दुराचार करें तो भी कारागार!
विरूद्व तो कुछ भी कारागारीय अपराध दर्ज नहीं हैं।’ इस तरह नोंक-झोंक होते-होते निरूपाय होकर अंत में चीफ कमिश्नर को स्पष्ट शब्दों में कहना पड़ा कि ‘आपको कारागृह से बाहर नहीं निकाला जा सकता’ क्यांेकि ‘आपका कारागारीय आचरण’ बाहर गए हुए बंदियों की तुलना में अधिक अच्छा तो है, तथापि आपका पूर्वेतिहास महाभयंकर है।’¹ यदि पूर्वेतिहास पर ही गौर करना है तो फिर वर्तमान ‘आचरण अनापत्तिात’ होने का क्या लाभ हो सकता है? अर्थात् हम सदाचरण करें तो भी कारागार और दुराचार करें तो भी कारागार!