दो-दो करके लोग, पुनः कारागृह के लोग भी एक निश्चित दिवस पर एक साथ काम करने को मना करके एक साथ हो गए और इस प्रकार कारागृह में दूसरी हड़ताल का श्रीगणेश हुआ।
मेरे बंधु पहले ही दिन हड़ताल में सम्मिलित हो गए थे। दंडों की भरमार होने लगी। झुंड-के-झुंड पर्यवेक्षक के सामने खड़े किए जाते और हथकड़ी, दंडा-बेड़ी, कोठरी-बेड़ी आदि दंड जोर से चिल्लाकर सुनाए जाने लगे। प्रत्येक कक्ष में राजबंदी हथकड़ियों में लटके हुए दिखाई देने लगे। कोई हथकड़ी के साथ बैठने का प्रयास करने लगा,
दो-दो करके लोग, पुनः कारागृह के लोग भी एक निश्चित दिवस पर एक साथ काम करने को मना करके एक साथ हो गए और इस प्रकार कारागृह में दूसरी हड़ताल का श्रीगणेश हुआ।
मेरे बंधु पहले ही दिन हड़ताल में सम्मिलित हो गए थे। दंडों की भरमार होने लगी। झुंड-के-झुंड पर्यवेक्षक के सामने खड़े किए जाते और हथकड़ी, दंडा-बेड़ी, कोठरी-बेड़ी आदि दंड जोर से चिल्लाकर सुनाए जाने लगे। प्रत्येक कक्ष में राजबंदी हथकड़ियों में लटके हुए दिखाई देने लगे। कोई हथकड़ी के साथ बैठने का प्रयास करने लगा,