मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

जनों की आवश्यकता पड़ती। इस तरह बलात् खड़े करवाकर अपना सम्मान कराने से बारी भला कितने दिन तक संतुष्ट रह सकता था? राजबंदियों के काम बंद करने से उनका भाजेन भी तोड़ा गया। किसी को थोड़ा अन्न दिया जाता तो किसी को आठ-आठ दिनों तक केवल कांजी (नमक रहित) दी जाती। कहीं-कहीं मारपीट भी होने लगी। इस तरह सर्वत्र भगदड़ मची। इक्का-दुक्का मारपीट का समाचार मेरे कानों में आते ही मैंने बारी साहब को स्पष्ट चेतावनी दी कि ‘अभी तक राजबंदी केवल अप्रत्यक्ष रूप से ही नियम भंग कर रहे हैं,


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जनों की आवश्यकता पड़ती। इस तरह बलात् खड़े करवाकर अपना सम्मान कराने से बारी भला कितने दिन तक संतुष्ट रह सकता था? राजबंदियों के काम बंद करने से उनका भाजेन भी तोड़ा गया। किसी को थोड़ा अन्न दिया जाता तो किसी को आठ-आठ दिनों तक केवल कांजी (नमक रहित) दी जाती। कहीं-कहीं मारपीट भी होने लगी। इस तरह सर्वत्र भगदड़ मची। इक्का-दुक्का मारपीट का समाचार मेरे कानों में आते ही मैंने बारी साहब को स्पष्ट चेतावनी दी कि ‘अभी तक राजबंदी केवल अप्रत्यक्ष रूप से ही नियम भंग कर रहे हैं,


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