मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

सरकार को आवेदन-पत्र नहीं भेजने देते थे। ठस तरह हम घुटन का शिकार बन गए। मेरे बंधु तो मुझसे पूर्व ही आए हुए थे। परंतु उन्हें भी बाहर नहीं निकाला जाता। एक बार एक पर्यवेक्षक ने मुझसे तर्क करते हुए कहा, ‘‘यह सत्य है कि आपके प्रश्नांे का उत्तर नहीं है । परंतु आप हड़ताल को प्रोत्साहित करते हैं।’’ मैंने कहा, ‘‘परंतु हड़ताल में जो प्रत्यक्ष सम्मिलित होते हैं वे बाहर निकले हैं और यह तो


उचित ही है। तो फिर तुमने हड़ताल की, यह ठीक किया,


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सरकार को आवेदन-पत्र नहीं भेजने देते थे। ठस तरह हम घुटन का शिकार बन गए। मेरे बंधु तो मुझसे पूर्व ही आए हुए थे। परंतु उन्हें भी बाहर नहीं निकाला जाता। एक बार एक पर्यवेक्षक ने मुझसे तर्क करते हुए कहा, ‘‘यह सत्य है कि आपके प्रश्नांे का उत्तर नहीं है । परंतु आप हड़ताल को प्रोत्साहित करते हैं।’’ मैंने कहा, ‘‘परंतु हड़ताल में जो प्रत्यक्ष सम्मिलित होते हैं वे बाहर निकले हैं और यह तो


उचित ही है। तो फिर तुमने हड़ताल की, यह ठीक किया,


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