खाकर भी अपनी जीवट वृत्तिा का प्रदर्शन करने की उसमें जो एक तरह की सुरसुरी थी, उसका नशा ही उतर गया। उसके साहस, धैर्य की वाहवाही किए बिना शत्रु से भी रहा नहीं गया। अधिकारियों का यह अनुमान था कि उसे हमसे दूर करने और हमारे प्रोत्साहन की कक्षा से बाहर निकालने से वह नरम हो जाएगा, परंतु शीध्र ही उन्हें ज्ञात हो गया कि प्रोत्साहन की यह बात कितनी गलत थी, क्यांेकि हमसे दूर जाते ही उसने उस बाहरी बंदीवास में अन्न त्याग दिया।
जब
खाकर भी अपनी जीवट वृत्तिा का प्रदर्शन करने की उसमें जो एक तरह की सुरसुरी थी, उसका नशा ही उतर गया। उसके साहस, धैर्य की वाहवाही किए बिना शत्रु से भी रहा नहीं गया। अधिकारियों का यह अनुमान था कि उसे हमसे दूर करने और हमारे प्रोत्साहन की कक्षा से बाहर निकालने से वह नरम हो जाएगा, परंतु शीध्र ही उन्हें ज्ञात हो गया कि प्रोत्साहन की यह बात कितनी गलत थी, क्यांेकि हमसे दूर जाते ही उसने उस बाहरी बंदीवास में अन्न त्याग दिया।
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