देने वाला लाल मोहन बंगाली आगे चलकर और इसी तरह के एक कांड में मिथ्या समाचार देने के अपराधवश अधिकारियों का कोपभाजन बन गया था। इससे ज्ञात होता ही है कि उसके समाचार में कितना तथ्य था। आश्चर्यजनक बात यह थी कि इसी वाॅर्डर द्वारा पहले होतीलाल का पत्र इष्ट स्थान पर अपने हाथों से पहुंचाने का अधिकारियों को संदेह हो चुका था। हो सकता है, इसी संदेहवश अधिकारियों की भड़की हुई क्रोधाग्नि के शमनार्थ वाॅर्डर महाशय ने राजबंदियों के विरूद्व इस तरह चुगली खाई होगी। कुछ भी हो,
देने वाला लाल मोहन बंगाली आगे चलकर और इसी तरह के एक कांड में मिथ्या समाचार देने के अपराधवश अधिकारियों का कोपभाजन बन गया था। इससे ज्ञात होता ही है कि उसके समाचार में कितना तथ्य था। आश्चर्यजनक बात यह थी कि इसी वाॅर्डर द्वारा पहले होतीलाल का पत्र इष्ट स्थान पर अपने हाथों से पहुंचाने का अधिकारियों को संदेह हो चुका था। हो सकता है, इसी संदेहवश अधिकारियों की भड़की हुई क्रोधाग्नि के शमनार्थ वाॅर्डर महाशय ने राजबंदियों के विरूद्व इस तरह चुगली खाई होगी। कुछ भी हो,