आप भी इनसे शिष्टतापूर्ण व्यवहार नहीं करा सके। इन्हें तो उठते-बैठते लात-घूंसे चाहिए।
हम राजबंदी, जिन्हेें पहले ही बम भोले महादेव के प्रसाद से आजीवन कारावास का दंड प्राप्त हो चुका था, दिन-रात पुनः इस चिंता में डूब गए कि पुनः उसी बम महादेव की दूसरी कृपा कौन सा प्रसाद देगी। इस चिंता में हमारे बाहर निकलने का प्रश्न एक बार जो डूबा तो पुनः कभी ऊपर आ ही नहीं सका। बम-गोले और अंदमान को उड़ाकर भाग निकलने के षड्यंत्र का समाचार सुनने
आप भी इनसे शिष्टतापूर्ण व्यवहार नहीं करा सके। इन्हें तो उठते-बैठते लात-घूंसे चाहिए।
हम राजबंदी, जिन्हेें पहले ही बम भोले महादेव के प्रसाद से आजीवन कारावास का दंड प्राप्त हो चुका था, दिन-रात पुनः इस चिंता में डूब गए कि पुनः उसी बम महादेव की दूसरी कृपा कौन सा प्रसाद देगी। इस चिंता में हमारे बाहर निकलने का प्रश्न एक बार जो डूबा तो पुनः कभी ऊपर आ ही नहीं सका। बम-गोले और अंदमान को उड़ाकर भाग निकलने के षड्यंत्र का समाचार सुनने