न ज्यूरी ही-ऐसी अदालत में बारी जैसे कर्तृव्यशाली लोगों के मौजूद रहते, जो प्रमाण नहीं मिल सका तो यह कहने की आवश्यकता ही नहीं कि वह आरोप कितना काल्पनिक तथा अतिरंजित होगा। परंतु वह आरोप ठोस न सही तथापि सुविधाजनक था। उसके द्वारा हिुंदस्थान सरकार को भयंकर चित्र उकेरकर भेजना संभव हो गया और उनकी इस तरह धारणा का कि राजबंदियों की इस बला को कारागार में ही बंद रखना ठीक है और इस तरह मुझे कारागृह से बाहर छोड़ने की आपत्तिा भी सहज टालने
न ज्यूरी ही-ऐसी अदालत में बारी जैसे कर्तृव्यशाली लोगों के मौजूद रहते, जो प्रमाण नहीं मिल सका तो यह कहने की आवश्यकता ही नहीं कि वह आरोप कितना काल्पनिक तथा अतिरंजित होगा। परंतु वह आरोप ठोस न सही तथापि सुविधाजनक था। उसके द्वारा हिुंदस्थान सरकार को भयंकर चित्र उकेरकर भेजना संभव हो गया और उनकी इस तरह धारणा का कि राजबंदियों की इस बला को कारागार में ही बंद रखना ठीक है और इस तरह मुझे कारागृह से बाहर छोड़ने की आपत्तिा भी सहज टालने