मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas




रूप में समझते ही कि मैं तीन-तीन दिन तक¹ अन्न ग्रहण नहीं करता, नानी को बहुत दुःख हुआ। बारी बाबा के साथ मुझे उससे मिलने के लिए भेजा गया।

भूख हड़ताल का अंत

अन्न त्याग, अनशन करके स्वयं भूखों मरने की स्वपक्षविघातक युद्व-पद्वति का मैं तीव्र विरोध कर रहा था। इसके परिणामस्वरूप अन्न त्याग की कल्पना का सभी ने परित्याग किया। सभी में नानी गोपाल को अन्न ग्रहणार्थ मना लेना दुष्कर था। सभी उपाय बेकार हुए। वह मरणावस्था पर पहुंच


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रूप में समझते ही कि मैं तीन-तीन दिन तक¹ अन्न ग्रहण नहीं करता, नानी को बहुत दुःख हुआ। बारी बाबा के साथ मुझे उससे मिलने के लिए भेजा गया।

भूख हड़ताल का अंत

अन्न त्याग, अनशन करके स्वयं भूखों मरने की स्वपक्षविघातक युद्व-पद्वति का मैं तीव्र विरोध कर रहा था। इसके परिणामस्वरूप अन्न त्याग की कल्पना का सभी ने परित्याग किया। सभी में नानी गोपाल को अन्न ग्रहणार्थ मना लेना दुष्कर था। सभी उपाय बेकार हुए। वह मरणावस्था पर पहुंच


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