गया। अतः मैंने ऐसे धीरोदात्त पुरूष का जीवन मटियामेट न हो, इसके लिए अंतिम उपाय की योजना बनाई। मैंने उसे धमकी दी, यदि तुमने अन्न ग्रहण नहीं किया तो मुझे भी अन्न त्याग करना होगा। परंतु दूसरे ही दिन उसने मेरा कहना मानकर अन्न ग्रहण करने का निश्चय किया। मैंने उसे समझाया, ‘‘मरना ही है तो इस तरह त्रिया हठ करके व्यर्थ मत मरो। कुछ-न-कुछ ं ं ंफिर मरो।’’ अंत में उसने भी अन्न ग्रहण किया, मैंने भी अनशन व्रत तोड़ा- अब दो बार जो भोजन
गया। अतः मैंने ऐसे धीरोदात्त पुरूष का जीवन मटियामेट न हो, इसके लिए अंतिम उपाय की योजना बनाई। मैंने उसे धमकी दी, यदि तुमने अन्न ग्रहण नहीं किया तो मुझे भी अन्न त्याग करना होगा। परंतु दूसरे ही दिन उसने मेरा कहना मानकर अन्न ग्रहण करने का निश्चय किया। मैंने उसे समझाया, ‘‘मरना ही है तो इस तरह त्रिया हठ करके व्यर्थ मत मरो। कुछ-न-कुछ ं ं ंफिर मरो।’’ अंत में उसने भी अन्न ग्रहण किया, मैंने भी अनशन व्रत तोड़ा- अब दो बार जो भोजन