पहले अंदमान में कोई भी वरिष्ठ अधिकारी नहीं आता था और यदि इक्का-दुक्का आ भी जाए तो उसका आगमन इतना गुप्त रखा जाता था कि बंदियों को यह ज्ञात होना असंभव होता कि यह कोई यात्री है या अधिकारी। इससे कइयों को अपनी शिकायतें उसे बताने का अवसर ही नहीं मिलता। यह देखकर कि कोई चूं तक नहीं करता, वे अधिकारी वापस लौटते और प्रतिवेदन (त्मचवतज) करते कि सब ठीक-ठाक है। इस बार ऐसा अवसर न आ जाए इसलिए राजबंदियों को गुप्त रूप से गृहमंत्री के आगमन का समाचार मिलते ही उन्होंने
पहले अंदमान में कोई भी वरिष्ठ अधिकारी नहीं आता था और यदि इक्का-दुक्का आ भी जाए तो उसका आगमन इतना गुप्त रखा जाता था कि बंदियों को यह ज्ञात होना असंभव होता कि यह कोई यात्री है या अधिकारी। इससे कइयों को अपनी शिकायतें उसे बताने का अवसर ही नहीं मिलता। यह देखकर कि कोई चूं तक नहीं करता, वे अधिकारी वापस लौटते और प्रतिवेदन (त्मचवतज) करते कि सब ठीक-ठाक है। इस बार ऐसा अवसर न आ जाए इसलिए राजबंदियों को गुप्त रूप से गृहमंत्री के आगमन का समाचार मिलते ही उन्होंने