यह मांग रखना प्रारंभ किया कि हम उनसे मिलना चाहते हैं
‘किसने बताया तुमको’ इस तरह चिल्लानेवालों की गीदड़भभकी की परवाह न करते हुए यह भी निश्चय किया गया कि यदि वरिष्ठ अधिकारी आए और उनसे मिलने नहीं दिया गया तो अपनी कोठरियों से जोर-जोर से पुकारा जाए, फिर भले ही नियमभंग का दंड मिले। आगे चलकर इसी निश्चय पर कई बार चलना पड़ा और राजबंदियों को दंड भी भुगतना पड़ा। अंत में जब सन् 1913 में गृहमंत्री सर रेजिनाॅल्ड क्रैडाॅक आए, उस समय
यह मांग रखना प्रारंभ किया कि हम उनसे मिलना चाहते हैं
‘किसने बताया तुमको’ इस तरह चिल्लानेवालों की गीदड़भभकी की परवाह न करते हुए यह भी निश्चय किया गया कि यदि वरिष्ठ अधिकारी आए और उनसे मिलने नहीं दिया गया तो अपनी कोठरियों से जोर-जोर से पुकारा जाए, फिर भले ही नियमभंग का दंड मिले। आगे चलकर इसी निश्चय पर कई बार चलना पड़ा और राजबंदियों को दंड भी भुगतना पड़ा। अंत में जब सन् 1913 में गृहमंत्री सर रेजिनाॅल्ड क्रैडाॅक आए, उस समय