है अपनी । मैंने आपकी सारी पुस्तकें पढ़ी है।। आपका ज्ञान और शक्ति यदि उचित मार्ग से व्यय की जाती तो आपको कोई भी श्रेष्ट सरकारी नौकरी मिल सकती थी, परंतु आपको यह दुर्गती ही रास आई।’’ मैंने कहा, ‘‘आपकी सहानुभति के लिए धन्यवाद! यह दुर्गति टालना आपके हाथ में है। हिंदुस्थान में अब विधिमंडल (कायदे कौंसिल) के सामने गोखले का अनिवार्य शिक्षा का प्रस्ताव आया है। यदि उससे सहमत होकर हमारे राष्ट्र को इसी तरह का वैधानिक विकास का पूरे मन से अवसर दिया जाए तो मैं ही क्यों,
है अपनी । मैंने आपकी सारी पुस्तकें पढ़ी है।। आपका ज्ञान और शक्ति यदि उचित मार्ग से व्यय की जाती तो आपको कोई भी श्रेष्ट सरकारी नौकरी मिल सकती थी, परंतु आपको यह दुर्गती ही रास आई।’’ मैंने कहा, ‘‘आपकी सहानुभति के लिए धन्यवाद! यह दुर्गति टालना आपके हाथ में है। हिंदुस्थान में अब विधिमंडल (कायदे कौंसिल) के सामने गोखले का अनिवार्य शिक्षा का प्रस्ताव आया है। यदि उससे सहमत होकर हमारे राष्ट्र को इसी तरह का वैधानिक विकास का पूरे मन से अवसर दिया जाए तो मैं ही क्यों,