और हड़ताल का जोर बढ़ेगा-इसी भय के कारण घर से आया हुआ वह पत्र मुझे नहीं दिया गया। हम सभी
ने हड़ताल में दो-तीन प्रधान मांगे प्रस्तुत कीं-
1. हमें राजबंदी समझकर उस वर्ग के प्रथम श्रेणी के अधिकार दिए जाएं।
2. अन्यथा मात्र साधारण बंदीवान समझकर अंदमान के अन्य बंदियों की तरह बाहर छोड़ा जाए, लिखने का काम दिया जाए। आखिर में यथासमय परिवार के सदस्यों को लाने की अनुमति दी जाए।
3. यदि यह भी न करना हो तो हमें हिंदुस्थान के कारागृह
और हड़ताल का जोर बढ़ेगा-इसी भय के कारण घर से आया हुआ वह पत्र मुझे नहीं दिया गया। हम सभी
ने हड़ताल में दो-तीन प्रधान मांगे प्रस्तुत कीं-
1. हमें राजबंदी समझकर उस वर्ग के प्रथम श्रेणी के अधिकार दिए जाएं।
2. अन्यथा मात्र साधारण बंदीवान समझकर अंदमान के अन्य बंदियों की तरह बाहर छोड़ा जाए, लिखने का काम दिया जाए। आखिर में यथासमय परिवार के सदस्यों को लाने की अनुमति दी जाए।
3. यदि यह भी न करना हो तो हमें हिंदुस्थान के कारागृह