मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

में ही भेजा जाए। फिर हम कम-से-कम वहां की सुविधाओं का तो लाभ उठा सकेंगे। छूट-दंड के दिवसों की कारागृहीय छूट भी मिलती रहेगी।

इन मांगों के लिए हड़ताल जारी रहते राजबंदी सरेआम सरकारी नियामों को अंगूठा दिखाने लगे। कड़े पहरे में विभिन्न कोठरियांे में दिन-रात बंद पड़े रहने से परस्पर योजनाएं तथा समाचार सूचित करना दूभर हो गया। जैसाकि पीछे वर्णन किया था-वह ‘दूरध्वनि’ बंद हो गया, क्योंकि आंगन स्थित दूसरी कोठरियों के छेद के पास जाना असंभव हो गया।


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में ही भेजा जाए। फिर हम कम-से-कम वहां की सुविधाओं का तो लाभ उठा सकेंगे। छूट-दंड के दिवसों की कारागृहीय छूट भी मिलती रहेगी।

इन मांगों के लिए हड़ताल जारी रहते राजबंदी सरेआम सरकारी नियामों को अंगूठा दिखाने लगे। कड़े पहरे में विभिन्न कोठरियांे में दिन-रात बंद पड़े रहने से परस्पर योजनाएं तथा समाचार सूचित करना दूभर हो गया। जैसाकि पीछे वर्णन किया था-वह ‘दूरध्वनि’ बंद हो गया, क्योंकि आंगन स्थित दूसरी कोठरियों के छेद के पास जाना असंभव हो गया।


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