भांप लिया- यह बेतार का तार यंत्र है। निरूपाय! ठन कुकर्मियों को बेड़िया मत खटखटाने दो, बस, यही कहकर वे चले गए। पर सुनता कौन? नियम है तो उसे रखो ताक पर।
ऐसी धमाचैकड़ी मची थी। भोजन परोसते समय घंटे भर के लिए राजबंदियों को खोलकर आंगन में लाया जाता। एक-दो दिन ठीक-ठाक बीत गए, परंतु पांचवें दिन सभी राजबंदी एक पंक्ति में परंतु दूरी पर थाली में भोजन ले रहे थे। इतने में सुश्राव्य अंगे्रजी में अचानक भाषण सुनाई देने लगा-‘ठतवजीमते!
भांप लिया- यह बेतार का तार यंत्र है। निरूपाय! ठन कुकर्मियों को बेड़िया मत खटखटाने दो, बस, यही कहकर वे चले गए। पर सुनता कौन? नियम है तो उसे रखो ताक पर।
ऐसी धमाचैकड़ी मची थी। भोजन परोसते समय घंटे भर के लिए राजबंदियों को खोलकर आंगन में लाया जाता। एक-दो दिन ठीक-ठाक बीत गए, परंतु पांचवें दिन सभी राजबंदी एक पंक्ति में परंतु दूरी पर थाली में भोजन ले रहे थे। इतने में सुश्राव्य अंगे्रजी में अचानक भाषण सुनाई देने लगा-‘ठतवजीमते!