पठान जनजाति की बुद्विमानी तथा शूरता की मैं भी भूरी-भूरी प्रशंसा करता हूं। परंतु यदि सारे-के-सारे पठान शूर होते और सारे-के-सारे हिंदू शूर न होते तो आपका पठानी अथवा मुसलमानी तख्त कैसे पलट सकते थे?’’
हड़ताल जारी थी, तब अंत में हिंदुस्थान सरकार का ओदश आया कि राजबंदियों की नई व्यवस्था की जाए।
इस आदेश¹ का पाठ बड़े ठाठ-बाट, ताम-झाम के साथ सभी को इकट्ठा करके किया गया। उसमें प्रमुख बिंदु थे-
1. राजबंदियों में जो सावधि बंदी हैं,
पठान जनजाति की बुद्विमानी तथा शूरता की मैं भी भूरी-भूरी प्रशंसा करता हूं। परंतु यदि सारे-के-सारे पठान शूर होते और सारे-के-सारे हिंदू शूर न होते तो आपका पठानी अथवा मुसलमानी तख्त कैसे पलट सकते थे?’’
हड़ताल जारी थी, तब अंत में हिंदुस्थान सरकार का ओदश आया कि राजबंदियों की नई व्यवस्था की जाए।
इस आदेश¹ का पाठ बड़े ठाठ-बाट, ताम-झाम के साथ सभी को इकट्ठा करके किया गया। उसमें प्रमुख बिंदु थे-
1. राजबंदियों में जो सावधि बंदी हैं,