यह भारी नहीं है। तुम जाओ, तुम्हें देर होगी। मैं चली जाऊंगी।'
मगर रतन ने न माना, कार से उतरकर उसके हाथ से बेग ले ही लिया
और कार में रखती हुई बोली, 'क्या भरा है तुमने इसमें, बहुत भारी है। खोलकर देखूं?'
जालपा-'इसमें तुम्हारे देखने लायक कोई चीज़ नहीं है।'
बेग में ताला न लगा था। रतन ने खोलकर देखा, तो विस्मित होकर बोली, 'इन चीज़ों को कहां लिये जाती हो?'
जालपा ने कार पर बैठते हुए कहा, 'इन्हें गंगा में बहा दूंगी।'
यह भारी नहीं है। तुम जाओ, तुम्हें देर होगी। मैं चली जाऊंगी।'
मगर रतन ने न माना, कार से उतरकर उसके हाथ से बेग ले ही लिया
और कार में रखती हुई बोली, 'क्या भरा है तुमने इसमें, बहुत भारी है। खोलकर देखूं?'
जालपा-'इसमें तुम्हारे देखने लायक कोई चीज़ नहीं है।'
बेग में ताला न लगा था। रतन ने खोलकर देखा, तो विस्मित होकर बोली, 'इन चीज़ों को कहां लिये जाती हो?'
जालपा ने कार पर बैठते हुए कहा, 'इन्हें गंगा में बहा दूंगी।'