ख़र्च हो गए होंगे।
यह कहते हुए देवीदीन ने पांच गिन्नियां कमर से निकालकर मेज़ पर रख दीं।
दारोग़ा ने तड़पकर कहा, 'यह क्या है?'
देवीदीन-'कुछ नहीं है, हुजूर को पान खाने को।'
दारोग़ा -'रिश्वत देना चाहता है! क्यों? कहो तो बचा, इसी इल्ज़ाम में भेज दूं।'
देवीदीन-'भेज दीजिए सरकार। घरवाली लकड़ी-कफन की फिकर से छूट जाएगी। वहीं बैठा आपको दुआ दूंगा।'
दारोग़ा -'अबे इन्हें छुडाना है तो पचास गिन्नियां लाकर सामने रक्खो। जानते
ख़र्च हो गए होंगे।
यह कहते हुए देवीदीन ने पांच गिन्नियां कमर से निकालकर मेज़ पर रख दीं।
दारोग़ा ने तड़पकर कहा, 'यह क्या है?'
देवीदीन-'कुछ नहीं है, हुजूर को पान खाने को।'
दारोग़ा -'रिश्वत देना चाहता है! क्यों? कहो तो बचा, इसी इल्ज़ाम में भेज दूं।'
देवीदीन-'भेज दीजिए सरकार। घरवाली लकड़ी-कफन की फिकर से छूट जाएगी। वहीं बैठा आपको दुआ दूंगा।'
दारोग़ा -'अबे इन्हें छुडाना है तो पचास गिन्नियां लाकर सामने रक्खो। जानते