अलंकार - Alankar

उसी भांति यह आनन्द की देवी हृदय में आनन्द का संचार करती थी।

समस्त नगर में हलचल मची हुई थी। कोई पापनाशी को गालियां देता था, कोई ईसाई धर्म को और कोई स्वयं परभु मसीह को सलवातें सुनाता था। और थायस के त्याग की भी बड़ी तीवर आलोचना हो रही थी। ऐसा कोई समाज न था जहां कुहराम न मचा हो।

'यों मुंह छिपाकर जाना लज्जास्पद है !'

'यह कोई भलमनसाहत नहीं है !'

'अजी, यह तो हमारे पेट की रोटियां छीने लेती है !'

'वह आने वाली सन्तान


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उसी भांति यह आनन्द की देवी हृदय में आनन्द का संचार करती थी।

समस्त नगर में हलचल मची हुई थी। कोई पापनाशी को गालियां देता था, कोई ईसाई धर्म को और कोई स्वयं परभु मसीह को सलवातें सुनाता था। और थायस के त्याग की भी बड़ी तीवर आलोचना हो रही थी। ऐसा कोई समाज न था जहां कुहराम न मचा हो।

'यों मुंह छिपाकर जाना लज्जास्पद है !'

'यह कोई भलमनसाहत नहीं है !'

'अजी, यह तो हमारे पेट की रोटियां छीने लेती है !'

'वह आने वाली सन्तान


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