और परम आनन्द की अवस्था में परत्यक्ष वस्तुएं दिखाई देती हैं। परम पिता, आपने पवित्र गरन्थ स्वयं कितनी ही बार स्वप्न के गुणों को और छायामूर्तियों की शक्तियों को, चाहे वह तेरी ओर से हों या तेरे शत्रु की ओर से, स्पष्ट और कई स्थानों पर स्वीकार किया है। फिर यदि मैं भरांति में जा पड़ा तो मुझे क्यों इतना कष्ट दिया जा रहा है ?
पहले पापनाशी ईश्वर से तर्क न करता था। वह निरापद भाव से उसके आदेशों का पालन करता था। पर अब उसमें एक
और परम आनन्द की अवस्था में परत्यक्ष वस्तुएं दिखाई देती हैं। परम पिता, आपने पवित्र गरन्थ स्वयं कितनी ही बार स्वप्न के गुणों को और छायामूर्तियों की शक्तियों को, चाहे वह तेरी ओर से हों या तेरे शत्रु की ओर से, स्पष्ट और कई स्थानों पर स्वीकार किया है। फिर यदि मैं भरांति में जा पड़ा तो मुझे क्यों इतना कष्ट दिया जा रहा है ?
पहले पापनाशी ईश्वर से तर्क न करता था। वह निरापद भाव से उसके आदेशों का पालन करता था। पर अब उसमें एक