अलंकार - Alankar

नये भाव का विकास हुआ-उसने ईश्वर से परश्न और शंकाएं करनी शुरू कीं, किन्तु ईश्वर ने उसे वह परकाश न दिखाया जिसका वह इच्छुक था। उसकी रातें एक दीर्घ स्वप्न होती थीं, और उसके दिन भी इस विषय में रातों ही के सदृश होते थे। एक रात वह जागा तो उसके मुख से ऐसी पश्चात्तापपूर्ण आहें निकल रही थीं, जैसी चांदनी रात में पापाहत मनुष्यों की कबरों से निकला करती हैं। थायस आ पहुंची थी, और उसके जख्मी पैरों से खून बह रहा था। किन्तु पापनाशी रोने


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नये भाव का विकास हुआ-उसने ईश्वर से परश्न और शंकाएं करनी शुरू कीं, किन्तु ईश्वर ने उसे वह परकाश न दिखाया जिसका वह इच्छुक था। उसकी रातें एक दीर्घ स्वप्न होती थीं, और उसके दिन भी इस विषय में रातों ही के सदृश होते थे। एक रात वह जागा तो उसके मुख से ऐसी पश्चात्तापपूर्ण आहें निकल रही थीं, जैसी चांदनी रात में पापाहत मनुष्यों की कबरों से निकला करती हैं। थायस आ पहुंची थी, और उसके जख्मी पैरों से खून बह रहा था। किन्तु पापनाशी रोने


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