अलंकार - Alankar

लगा कि वह धीरे से उसकी चारपाई पर आकर लेट गयी। अब कोई सन्देह न रहा, सारी शंकाएं निवृत्त हो गयीं। थायस की छाया वासनायुक्त थी।

उसके मन में घृणा की एक लहर उठी। वह अपनी अपवित्र शैया से झपटकर नीचे कूद पड़ा और अपना मुंह दोनों हाथों से छिपा लिया कि सूर्य का परकाश न पड़ने पाये। दिन की घड़ियां गुजरती जाती थीं, किन्तु उसकी लज्जा और ग्लानि शान्त न होती थी। कुटी में पूरी शान्ति थी। आज बहुत दिनों के पश्चात परथम बार थायस को एकान्त मिला। आखिर में छाया ने भी उसका साथ छोड़ दिया,


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लगा कि वह धीरे से उसकी चारपाई पर आकर लेट गयी। अब कोई सन्देह न रहा, सारी शंकाएं निवृत्त हो गयीं। थायस की छाया वासनायुक्त थी।

उसके मन में घृणा की एक लहर उठी। वह अपनी अपवित्र शैया से झपटकर नीचे कूद पड़ा और अपना मुंह दोनों हाथों से छिपा लिया कि सूर्य का परकाश न पड़ने पाये। दिन की घड़ियां गुजरती जाती थीं, किन्तु उसकी लज्जा और ग्लानि शान्त न होती थी। कुटी में पूरी शान्ति थी। आज बहुत दिनों के पश्चात परथम बार थायस को एकान्त मिला। आखिर में छाया ने भी उसका साथ छोड़ दिया,


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