उनके रोकने का मेरे पास अब कौनसा मन्त्र रहा ? और उसका भय निमूर्ल न था। वह सातों गीदड़ जो कभी उसकी चौखट के भीतर न आ सके थे, अब कतार बांधकर आये और भीतर आकर उसके पलंग के नीचे छिप गये। संध्या परार्थना के समय एक और आठवां गीदड़ भी आया, जिसकी दुर्गन्ध असह्य थी। दूसरे दिन नवां गीदड़ भी उनमें आ मिला और उनकी संख्या ब़तेबढ़ते तीस से साठ और साठ से अस्सी तक पहुंच गयी। जैसेजैसे उनकी संख्या ब़ती थी, उनका आहार छोटा होता जाता था, यहां
उनके रोकने का मेरे पास अब कौनसा मन्त्र रहा ? और उसका भय निमूर्ल न था। वह सातों गीदड़ जो कभी उसकी चौखट के भीतर न आ सके थे, अब कतार बांधकर आये और भीतर आकर उसके पलंग के नीचे छिप गये। संध्या परार्थना के समय एक और आठवां गीदड़ भी आया, जिसकी दुर्गन्ध असह्य थी। दूसरे दिन नवां गीदड़ भी उनमें आ मिला और उनकी संख्या ब़तेबढ़ते तीस से साठ और साठ से अस्सी तक पहुंच गयी। जैसेजैसे उनकी संख्या ब़ती थी, उनका आहार छोटा होता जाता था, यहां