तक कि वह चूहों के बराबर हो गये और सारी कुटी में फैल गये-पलंग, मेज, तिपाई, फर्श एक भी उनसे खाली न बचा। उनमें से एक मेज पर कूद गया और उसके तकिये पर चारों पैर रखकर पापनाशी के मुख की ओर जलती हुई आंखों से देखने लगा। नित्य नयेनये गीदड़ आने लगे।
अपने स्वप्न के भीषण पाप का परायश्चित करने और भरष्ट विचारों से बचने के लिए पापनाशी ने निश्चय किया कि अपनी कुटी से निकल जाऊं तो अब पाप का बसेरा बन गयी है और मरुभूमि में दूर जाकर कठिनसे-कठिन तपस्याएं करुं,
तक कि वह चूहों के बराबर हो गये और सारी कुटी में फैल गये-पलंग, मेज, तिपाई, फर्श एक भी उनसे खाली न बचा। उनमें से एक मेज पर कूद गया और उसके तकिये पर चारों पैर रखकर पापनाशी के मुख की ओर जलती हुई आंखों से देखने लगा। नित्य नयेनये गीदड़ आने लगे।
अपने स्वप्न के भीषण पाप का परायश्चित करने और भरष्ट विचारों से बचने के लिए पापनाशी ने निश्चय किया कि अपनी कुटी से निकल जाऊं तो अब पाप का बसेरा बन गयी है और मरुभूमि में दूर जाकर कठिनसे-कठिन तपस्याएं करुं,