ऐसीऐसी सिद्धियों में रत हो जाऊं जो किसी ने सुनी भी न हों, परोपकार और उद्घार के पथ पर और भी उत्साह से चलूं। लेकिन इस निश्चय को कार्यरूप में लाने से पहले वह सन्त पालम के पास उससे परामर्श करने गया।
उसने पालम को अपने बगीचे में पौधों को सींचते हुए पाया। संध्या हो गयी थी। नील नदी की नीली धारा ऊंचे पर्वतों के दामन में बह रही थी। वह सात्त्विक हृदय वृद्ध साधु धीरेधीरे चल रहा था कि कहीं वह कबूतर चौंककर उड़ न जाये जो उसके कन्धे पर आ बैठा था।
ऐसीऐसी सिद्धियों में रत हो जाऊं जो किसी ने सुनी भी न हों, परोपकार और उद्घार के पथ पर और भी उत्साह से चलूं। लेकिन इस निश्चय को कार्यरूप में लाने से पहले वह सन्त पालम के पास उससे परामर्श करने गया।
उसने पालम को अपने बगीचे में पौधों को सींचते हुए पाया। संध्या हो गयी थी। नील नदी की नीली धारा ऊंचे पर्वतों के दामन में बह रही थी। वह सात्त्विक हृदय वृद्ध साधु धीरेधीरे चल रहा था कि कहीं वह कबूतर चौंककर उड़ न जाये जो उसके कन्धे पर आ बैठा था।