अलंकार - Alankar



पापनाशी को देखकर उसने कहा-'भाई पापनाशी को नमस्कार करता हूं। देखो, परम पिता कितना दयालु है; वह मेरे पास अपने रचे हुए पशुओं को भेजता है कि मैं उनके साथ उनका कीर्तिगान करुं और हवा में उड़ने वाले पक्षियों को देखकर उनकी अनन्तलीला का आनन्द उठाऊं। इस कबूतर को देखो, उसकी गर्दन के बदलते हुए रंगों को देखो, क्या वह ईश्वर की सुन्दर रचना नहीं है ? लेकिन तुम तो मेरे पास किसी धार्मिक विषय पर बातें करने आये हो न ? यह लो, मैं अपना


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पापनाशी को देखकर उसने कहा-'भाई पापनाशी को नमस्कार करता हूं। देखो, परम पिता कितना दयालु है; वह मेरे पास अपने रचे हुए पशुओं को भेजता है कि मैं उनके साथ उनका कीर्तिगान करुं और हवा में उड़ने वाले पक्षियों को देखकर उनकी अनन्तलीला का आनन्द उठाऊं। इस कबूतर को देखो, उसकी गर्दन के बदलते हुए रंगों को देखो, क्या वह ईश्वर की सुन्दर रचना नहीं है ? लेकिन तुम तो मेरे पास किसी धार्मिक विषय पर बातें करने आये हो न ? यह लो, मैं अपना


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